Welcome to the sacred path of Dharma! यहाँ आपको Vaidik Pooja, Dharm, Jyotish aur Sanskrit Shastra se जुड़ा हर मार्गदर्शन मिलेगा – शुद्ध वैदिक विधि, परंपरा और श्रद्धा के साथ। Take your first step towards spiritual clarity and divine wisdom.

श्री गणेश आरती
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥
पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥
दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
आरती का महत्व
- गणेश जी की आरती हर पूजा में करनी चाहिए।
- इस आरती के माध्यम से विघ्न, दुख और बाधाएँ दूर होती हैं।
- घर और मन में शांति, सुख और समृद्धि आती है।
- आरती के दौरान भक्ति भाव से पढ़ना या सुनना विशेष लाभकारी होता है।
पूजा सुझाव
- पूजा से पहले गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- दीपक और धूप जलाएं।
- आरती से पहले भोग अर्पित करें और भक्ति भाव से गाएं।






