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नवरात्रि पूजन – शक्ति आराधना का महापर्व
नवरात्रि हिंदू धर्म का अत्यंत पावन और शक्तिपूजा का पर्व है। यह वर्ष में दो बार मनाया जाता है – चैत्र नवरात्रि और आश्विन नवरात्रि। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा, माँ भगवती, माँ काली, माँ चामुंडा सहित विभिन्न स्वरूपों की उपासना की जाती है। नवरात्रि का अर्थ है – “नौ रातें”, और इन दिनों में साधक, श्रद्धालु और भक्त आत्मशुद्धि, तप, संयम, पूजा और ध्यान के माध्यम से देवी शक्ति का आवाहन करते हैं।

नवरात्रि पूजन का महत्व
नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मबल, संयम, धैर्य और श्रद्धा का प्रतीक है। यह पर्व हमें भीतर की शक्तियों को जागृत करने का संदेश देता है। देवी की आराधना से मानसिक शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। साथ ही, नवरात्रि का व्रत शरीर और मन दोनों को अनुशासन में लाता है।
नवरात्रि पूजन की तैयारी
पूजन से पहले घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल को स्वच्छ और पवित्र बनाया जाता है। इसके बाद घट स्थापना, कलश पूजन, देवी प्रतिमा या चित्र की स्थापना और व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा में आवश्यक सामग्री जैसे — रोली, चावल, कलश, जल, नारियल, फूल, दीप, अगरबत्ती, नैवेद्य आदि का विशेष महत्व है। प्रत्येक दिन देवी के अलग स्वरूप की पूजा की जाती है और मंत्रों, स्तोत्रों, आरती और भजनों से वातावरण को पवित्र बनाया जाता है।
नौ दिनों का पूजन क्रम
- प्रथम दिन – शैलपुत्री
माँ शैलपुत्री की पूजा से पर्व का शुभारंभ होता है। यह पर्व की शुरुआत शक्ति की प्रथम अवस्था का स्मरण है। - द्वितीय दिन – ब्रह्मचारिणी
तप और संयम का प्रतीक। साधक आत्मानुशासन का संकल्प लेता है। - तृतीय दिन – चंद्रघंटा
साहस और निडरता की देवी। भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाती हैं। - चतुर्थ दिन – कूष्मांडा
सृष्टि की ऊर्जा देने वाली माँ का ध्यान किया जाता है। - पंचम दिन – स्कंदमाता
माँ की वात्सल्य शक्ति का स्मरण कर परिवार में प्रेम और संतुलन की प्रार्थना की जाती है। - षष्ठम दिन – कात्यायनी
नकारात्मकता से रक्षा और जीवन में सफलता का आशीर्वाद माँगा जाता है। - सप्तम दिन – कालरात्रि
अज्ञान और भय का नाश करने वाली देवी की उपासना की जाती है। - अष्टम दिन – महागौरी
शुद्धता, आत्मविश्वास और सौम्यता की देवी की पूजा से मन को शांति मिलती है। - नवम दिन – सिद्धिदात्री
आत्मसिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नवरात्रि व्रत की विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर कलश, घट, देवी प्रतिमा स्थापित करें।
- संकल्प लेकर व्रत का आरंभ करें।
- प्रतिदिन देवी की आराधना करें, मंत्र जाप करें और आरती करें।
- सात्विक भोजन करें, अधिक से अधिक ध्यान और जप करें।
- नवमी या दशमी को हवन, कन्या पूजन और प्रसाद वितरण करें।
कन्या पूजन का विशेष महत्व
अष्टमी और नवमी को कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराना शुभ माना जाता है। इसे “कन्या पूजन” या “कन्या भोज” कहते हैं। यह माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का सुंदर तरीका है।
नवरात्रि में विशेष मंत्र
- या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
यह मंत्र नवरात्रि के प्रत्येक दिन जपने से मानसिक शांति, शक्ति और आत्मबल बढ़ता है।
नवरात्रि पूजन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
नवरात्रि में व्रत और साधना शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया में सहायक होते हैं। संयमित आहार से पाचन सुधरता है, ध्यान से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है और प्रार्थना से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह पर्व प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित कर जीवन में अनुशासन लाने का संदेश देता है।
निष्कर्ष
नवरात्रि पूजन केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मानुशासन, शक्ति, करुणा, प्रेम और आध्यात्मिक विकास का मार्ग है। श्रद्धा और समर्पण के साथ की गई पूजा जीवन में नई ऊर्जा और उद्देश्य प्रदान करती है। आइए, इस नवरात्रि अपने भीतर की शक्ति को पहचानें और माँ दुर्गा की कृपा से जीवन को उज्ज्वल बनाएं।






