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माँ दुर्गा केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि सभी दुखों और कष्टों को हरने वाली दैवीय माता हैं। उनके भक्तों के लिए उनका प्रेम और आशीर्वाद जीवन में सुख, वैभव और आत्मिक शांति लाता है। नीचे प्रस्तुत कविता माँ के इसी स्वरूप का सुंदर चित्रण करती है।

माँ दुर्गा की वंदना
जब संतों पर वार हुआ है,
माता का अवतार हुआ है।
दुख सबके वो हर लेती हैं,
सुख वैभव सबको देती हैं।
शेर सवारी शोभा प्यारी,
माँ की सूरत सबसे न्यारी।
भैरो – हनुमत करते सेवा,
माँ दोनों को देतीं मेवा।
लाल चुनरिया पहने माता,
इनकी महिमा सब जग गाता।
करती सबको प्यार बराबर,
माँ का दिल है जैसे सागर।
मुख मंडल पे सूरज चमके,
शंख, त्रिशूल, गदा भी दमके।
माँ के चरणों का मैं प्यासा,
बस उनसे ही सबको आशा।
भावार्थ
- माता का अवतार – संकट के समय माँ का प्रकट होना।
- सुख और वैभव की दाता – सभी भक्तों को जीवन में आनंद और आशीर्वाद प्रदान करना।
- शक्तिशाली स्वरूप – शेर पर सवारी, त्रिशूल, गदा और सूरज जैसी तेजस्विता।
- भक्ति और प्रेम – सभी के लिए समान प्रेम और आश्रय का प्रतीक।
माँ दुर्गा न केवल शक्ति की देवी हैं, बल्कि सभी संकटों और दुखों का नाश करने वाली, प्रेम और आशा देने वाली माता भी हैं। उनके चरणों में समर्पण और भक्ति से जीवन में सुख-शांति और वैभव की प्राप्ति होती है।
🙏 जय माता दी! 🙏






