Welcome to the sacred path of Dharma! यहाँ आपको Vaidik Pooja, Dharm, Jyotish aur Sanskrit Shastra se जुड़ा हर मार्गदर्शन मिलेगा – शुद्ध वैदिक विधि, परंपरा और श्रद्धा के साथ। Take your first step towards spiritual clarity and divine wisdom.
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और मंगल कार्यों के प्रथम पूज्य देवता के रूप में माना जाता है। तुलसीदास जी द्वारा रचित “गाइये गणपति जगवंदन” भजन भगवान गणेश की स्तुति में गाया जाने वाला एक प्रसिद्ध भक्तिगीत है। इसे गाने से मन में श्रद्धा, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गाइये गणपति जगवंदन – गणेश वंदना (भजन)
गाइये गणपति जगवंदन ।
शंकर सुवन भवानी के नंदन ॥
सिद्धि सदन गजवदन विनायक ।
कृपा सिंधु सुंदर सब लायक ॥
गाइये गणपति जगवंदन ।
शंकर सुवन भवानी के नंदन ॥
मोदक प्रिय मुद मंगल दाता ।
विद्या बारिधि बुद्धि विधाता ॥
गाइये गणपति जगवंदन ।
शंकर सुवन भवानी के नंदन ॥
मांगत तुलसीदास कर जोरे ।
बसहिं रामसिय मानस मोरे ॥
गाइये गणपति जगवंदन ।
शंकर सुवन भवानी के नंदन ॥
🌸 भजन का महत्व
- यह भजन भगवान गणेश की महिमा का गान करता है।
- इसे गाने से बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
- जीवन में आने वाले विघ्न-बाधाएँ दूर होती हैं।
- तुलसीदास जी ने इसमें अपनी भक्ति और भगवान श्रीराम के प्रति समर्पण का भाव भी जोड़ा है।
🌺 FAQ
गाइये गणपति जगवंदन भजन किसने लिखा है?
यह भजन संत तुलसीदास जी की रचना है।
इस भजन का गान कब करना श्रेष्ठ होता है?
प्रातःकाल, पूजा के समय अथवा किसी भी शुभ कार्य के आरंभ से पहले।
इस भजन के गाने का क्या लाभ है?
इससे मन को शांति, आत्मबल और विघ्न-बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
क्या इसे केवल संगीतज्ञ ही गा सकते हैं?
नहीं, इसे कोई भी श्रद्धालु भावपूर्वक गा सकता है।






