Sanatan

Sanatan

नवरात्रि पूजन विधि, व्रत नियम और मंत्र – देवी दुर्गा की आराधना

नवरात्रि पूजन – शक्ति आराधना का महापर्व नवरात्रि हिंदू धर्म का अत्यंत पावन और शक्तिपूजा का पर्व है। यह वर्ष में दो बार मनाया जाता है – चैत्र नवरात्रि और आश्विन नवरात्रि। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा, माँ भगवती,…

नवरात्रि पूजन व्रत | Navratri Poojan Vrat

नवरात्रि पूजन व्रत: शक्ति, साधना और जीवन की नई शुरुआत नवरात्रि का पर्व भारत में केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाली साधना है। यह समय होता है जब हम अपने भीतर छिपी शक्ति से…

अन्नपूर्णा स्तोत्रम् – श्री शंकराचार्य कृत

माता अन्नपूर्णा, जो काशी (वाराणसी) की अधिष्ठात्री देवी और जगत को अन्न प्रदान करने वाली शक्ति हैं, उनकी स्तुति शंकराचार्य ने “अन्नपूर्णा स्तोत्रम्” के रूप में की है। यह स्तोत्र माता के दयालु, कृपालु और जीवनदाता स्वरूप का वर्णन करता…

गजबदन विनायक की आरती – गणेश आरती

भगवान गणेश को हर मंगल कार्य से पूर्व पूजनीय माना जाता है। गजबदन विनायक की आरती गणेश जी की महिमा का गान करती है और उनके भक्तों को शांति, बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करती है। इसे गाने से…

गाइये गणपति जगवंदन – गणेश वंदना

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और मंगल कार्यों के प्रथम पूज्य देवता के रूप में माना जाता है। तुलसीदास जी द्वारा रचित “गाइये गणपति जगवंदन” भजन भगवान गणेश की स्तुति में गाया जाने वाला एक…

नैमिषारण्य: कलियुग से रक्षा करने वाला क्षेत्र

नैमिषारण्य – कलियुग से मुक्ति का दिव्य द्वार भारत की भूमि अनादि काल से ऋषियों, मुनियों और भक्तों की तपोभूमि रही है। यहाँ के कण–कण में आध्यात्मिकता और भक्ति की सुगंध व्याप्त है। इन्हीं पावन स्थलों में से एक है…

संतान सप्तमी व्रत : संतति की रक्षा का पावन पर्व

संतान सप्तमी व्रत : मातृत्व की शक्ति और संतान सुख की साधना हिन्दू धर्म में संतान को जीवन की सबसे अमूल्य धरोहर माना गया है। माता-पिता का संपूर्ण जीवन उनकी संतान की खुशहाली, लंबी आयु और उज्ज्वल भविष्य की कामना…

योग : सनातन ज्ञान की अमूल्य धरोहर

योग केवल आसनों और व्यायाम का नाम नहीं है। यह भारत की प्राचीनतम परम्परा का वह अमूल्य रत्न है जो तन, मन और आत्मा तीनों का संतुलन स्थापित करता है। आज विश्वभर में ‘योग’ एक जीवन शैली बन चुका है,…

ऋग्वेद: भारतीय संस्कृति का आदिक ग्रंथ

ऋग्वेद भारतीय सभ्यता का प्राचीनतम और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है। यह वेदों में प्रथम स्थान रखता है और हिंदू धर्म की नींव को समृद्ध और सुदृढ़ करता है। ऋग्वेद को संस्कृत में रचित किया गया था, और इसे प्राचीन…

अहं ब्रह्मास्मि: आत्मा और ब्रह्म का अद्वैत दर्शन

“अहं ब्रह्मास्मि” (I am Brahman) उपनिषदों का एक प्रसिद्ध और गहन वेदांत वाक्य है, जिसे महावाक्य कहा जाता है। यह वाक्य बृहदारण्यक उपनिषद से लिया गया है और अद्वैत वेदांत के मूल सिद्धांतों को स्पष्ट करता है। इसका अर्थ है…